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10 महाभारत की ऐसी अनसुनी बाते जो आपने कभी नहीं सुनी होगी

These are lesser known facts from The Mahabharata in hindi

महाभारत सिंहासन के लिए कौरवों और पांडव भाई के बीच प्रतिद्वंद्विता के बारे में है जो हमें जीवन जीने की बोहोत सिख देता है। दुनिया का सबसे बड़े महाकाव्य महाभारत के बारे में कुछ ऐसे तथ्य हे जिसके बारेमे सायद ही अपने कभी सुना होगा। आज हम ‘facts about mahabharata‘ के बारे में बात करेंगे।

1) महाभारत का असली नाम जयम था – Mahabharata was originally known as Jayam

प्राचीन समय में महाभारत उसके मुल नाम महाभारत से नहीं जाना जाता था उस समय इस महाकाव्य को जयम ओर जया के नाम से जाना जाता था फिर इसे विजया, फिर भारत और अंत में महाभारत कहा गया।

जया जिसमे पच्चीस हजार श्लोक थे उसके अंतिम रूप में 1 लाख श्लोक थे। जया जो आध्यात्मिक विजय के बारे में दर्षाती थी विजया भौतिक विजय के बारे में दर्षाती थी।

2) पांडवो मे से सबसे छोटा सहदेव भविष्य देख शकता था – Sahdev could see the future

पांडवो में सबसे छोटा भाई सहदेव भविष्य देख सकता था उसे युद्ध के परिणाम के बारे में भी पता था लेकिन वह चुप रहा क्यों की उसे श्राप मिला था की उसकी इस शक्तियों के बारे मे अगर वो किशिको बताएगा तो वो मर जायेगा।

श्राप में ऐसी शर्त भी थी की वो किसी अजनबी को बता सकता है की आगे क्या होने वाला है लेकिन उस अजनबी को एक ही वाक्य में उत्तर देना होगा। भगवान कृष्ण ये जानते थे लेकिन उन्होंने सहदेव को चुप रहने की सलाह दी क्यों की अगर सहदेव यह भविष्य किसीको बता देता तो युद्ध ही ना होगा ओर अधर्म का नाश नहीं होगा।

3) वेदव्यास कोई नाम नहीं था एक पदवी थी – Vedvyas is post not a name

हम सभी जानते हे की महाभारत की रचना वेदव्यास जी ने की थी और गणेश जी ने लिखी थी। वेदव्यास कोई नाम नहीं परंतु एक पदवी है वेदो का सम्पूर्ण ज्ञान रखने वाले को वेदव्यास नाम से जाना जाता है।

4) सभी कौरव पाण्डवो के खिलाफ नहीं थे – Not all Kauravas were against the Pandavas

दुर्योधन के 2 भाई विकर्ण और युयुत्सु ने दुर्योधन के कार्यों को स्वीकार नहीं किया था उन दोनों ने द्रौपदी चिरहरण के समय भी दुर्योधन का विरोध किया था।

विकर्ण गांधारी और धृतराष्ट्र के तीसरे पुत्र था दुर्योधन और दुशासन के बाद कौरवों के तीसरे सबसे प्रतिष्ठित कौरव था। अपनी आशंकाओं के बावजूद कुरुक्षेत्र युद्ध के दौरान विकर्ण ने दुर्योधन की तरफ से लड़ाई लड़ी। पितामह भीष्म ने उन्हें कौरव पक्ष के महान योद्धाओं में नामित किया।

युयुत्सू युद्ध के आरंभ में दुर्योधन की ओर था युद्ध के आरंभ में महाराज युधिष्ठिर ने एक प्रश्ताव रखा की “कोई भी योद्धा मेरे दल मेसे दुर्योधन के दल में जाकर युद्ध करना चाहता हो तो वो जा सकता है” ओर “कोई योद्धा दुर्योधन के दल से मेरे दल में आना चाहता है तो वो आ सकता है”।

इस प्रस्ताव को सुनने के बाद युयुत्सु ने युधिष्ठिर के दल से युद्ध करना उचित समजा ओर वो पांडवो के दल मे चला गया।

5) महाभारत में विदुर यमराज के अवतार थे – Vidur was the avatar of Yamraj

महाभारत में विदुर धीतराष्ट्र ओर पाण्डु के सौतेले भाई थे जिन्हो ने वेदव्यास की दिव्य द्रिष्टि से एक दासी के पेट से जन्म लिया था धीतराष्ट्र ओर पाण्डु का जन्म भी वेदव्यास की दिव्य द्रिष्टि से ही हुआ था।

विदुर धर्म शास्त्र ओर अर्थ शास्त्र के महान विद्वान थे। यमराज के अवतार में उनसे ऋषि मांडव्य की आत्मा को समय से पहले यमलोक बुला लिया जो उनकी गलती थी फिर ऋषि मांडव्य के श्राप के कारण उन्हें मानव के रूप में जन्म लेना पड़ा।

6) भीष्म पितामह का वास्तविक नाम देवव्रत था – Bhishma pitamah’s real name is devavrata

देवव्रत शांतनु ओर देवी गंगा के पुत्र थे। जब देवव्रत एक युवा थे उनके पिता शांतनु शिकार पर गए और एक स्थानीय मछुआरे की बेटी सत्यवती के साथ प्यार में पड़ गए। तब सत्यवती के पिता ने एक कठिन शर्त रखी की हस्तिना पुर का उत्तराधिकारी सत्यवती के पुत्र बने।

यह बात सुनने के बाद देवव्रत ने अपने पिता को सत्यवती से मिलाने के लिए आजीवन विवाह ना करने की कठिन प्रतिग्या ले ली। तब से देवव्रत को भीष्म के नाम से जाना जाता है। भीष्म नाम का एक अर्थ “कठोर” भी होता है। यह mahabharata का ऐसा facts है जिसके बारे में अपने सायद ही सुना होगा।

7) कर्ण द्रौपदी हरण में मुख्य अपराधी था – Karna was the main delinquent in draupadi haran

कर्ण ने ही द्रोपदी का चिर हरण करने पर दुर्योधन को उकसाया था क्यों की द्रौपदी से उसकी आपसी दुश्मनी थी। द्रौपदी के लग्न स्वयंवर में कर्ण भी उपस्थित था वो जब धनुष उठाके द्रोपदी के स्वयंवर को जितने वाला था तब द्रोपदी ने उसे भरी सभा में अपमानित किया था ओर वो सुत पुत्र है इसलिए स्वयंवर में भाग नहीं ले सकता था यह भी कहा था।

8) अर्जुन की द्रौपदी के अलावा और भी पत्नियाँ थी – Arjun had two more wives apart from draupadi

“जो भी भाई द्रोपदी के साथ हो उसके कमरे में दुशरा भाई नहीं जा सकता” यह द्रोपदी का वैवाहिक कानुन था। एक बार अर्जुन से यह कानुन टूट गया ओर इस गलती का प्रायश्चित करने अर्जुन ‘तीर्थयात्रा’ पर निकल गया। तीर्थयात्रा समय दौरान अर्जुन ने चित्रांगदा (मणिपुर), उलूपी (नागा) की राजकुमारियों से विवाह किया था। फिर द्वारका जाकर भगवान श्री कृष्ण की बहन सुभद्रा से विवाह कर अपने साथ अपने राज्य इन्द्रप्रस्ठ ले गया। बाकि की दो पत्निओ को उनके ही राज्य रहने का सुझाव दिया था।

9) अर्जुन ओर भी ने एकबार दुर्योधन को बचाया था – Arjun once saved duryodhana

यह एक interesting facts है mahabharata के बारेमे की हमेसा से कौरव पांडवो के दुश्मन रहे है फिर भी अर्जुन ने उसकी मदत की। पांडवो के वनवास जाने पर दुर्योधन ने उन्हें परेशान करने के लिए अपने मित्र कर्ण ओर अपने भाई के साथ पांडवो की कुटिया के पास अपना तम्बू बनाया था। फिर रास्ते में जाती एक पनिहारी कन्या को छेड़ लिया।

कन्या के भाई ओर पुरे गांव ने दुर्योधन के तम्बु पर हमला बोल दिया कर्ण ओर दुर्योधन के बाकि भाईयो को भी बंदी बनालिया। इस बात का पता युधिष्ठिर को चला तो उसने भीम ओर अर्जुन को दुर्योधन को बचाने भेजा। अर्जुन के कहने पर गाँव वालो ने दुर्योधन की गलती को माफ़ किया।

10) महाभारत एक विश्व युद्ध था – Mahabharata was a world war

यह भी एक अनसुना facts है की Mahabharata की लड़ाई सिर्फ पांडवों और कौरवों के बीच नहीं थी रोम, ग्रीस की सेनाएं भी इसका एक हिस्सा थीं। हलाकि रोम, ग्रीस उस समय में कोई ओर नाम से जाना जाता था। उस समय पुरी दुनिया भारत वर्ष एक ही देश थी और सबका मुख्य और बड़ा राज्य हस्तिनापुर था। इस लिए महाभारत के युद्ध के समय पुरी दुनिया से सेनाएं बुलाई गयी थी ओर पूरी दुनिया के राजाओ ने इस महायुद्ध में भाग लिया था।

आपको हमारे mahabharata के facts कैसे लगे ये हमें कमेन्ट सेक्शन में जरूर बताना ओर इतिहास प्रेमी के साथ जरूर साजा करना। इतिहास की ऐसी कुछ बाते जानने के लिए यहाँ क्लिक करे

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