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क्यों शिवलिंग पर २४ घंटे पानी चढ़ाया जाता है, जाने वैज्ञानिक और आध्यात्मिक कारण।

शिवलिंग में ऐसे बोहोत रहस्य है जो काफी लोग जानते नहीं है। शिवलिंग तीन भागो में बटा हुवा होता है नीचे का हिस्सा जो चार-तरफा होता है जो भगवान ब्रह्मा का प्रतिक है। दुशरा मध्य भाग होता है जो आठ-तरफा रहता है जिसे भगवान विष्णु का प्रतिक माना जाता है। और एक शीर्ष भाग होता है जिसे वास्तव में पूजा जाता है जो भगवान शिव का प्रतिक माना जाता है।

सावन के महीने की सरुआत हो चुकी है और मंदिरो में शिवभक्त भगवान भोलेनाथ की पुजा करते है और उनकी असीम कृपा प्राप्त करते है। आपने भी मंदिरो में शिवलिंग पर पानी से भरा हुवा कलस देखा होगा जिसमे से 24 घंटे शिवलिंग पर पानी का अभिषेक होता रहता है। काफी लोग उनके पीछे का तर्क जानना चाहते है की इनके पीछे आध्यात्मिक और वैज्ञानिक कारण क्या हो सकता है। तो आइये हम आपके सवाल ‘shivling par 24 ghante jal kyu chadhaya jata hai ?’ के रहस्य के बारे में जानते है।

क्या है पौराणिक कारण ?

पौराणिक कथाओ के अनुसार जब समुद्र मंथन हुवा तब भगवन शिव ने विष पिया था और सृस्टि की रक्षा की। ऐसा मानने में आ रहा है की विष का प्रभाव कम करने के लिए शिवलिंग पर जल चढ़ाया जाता है। शिवपुराण में कहा गया है की शिव खुद ही जल है इसलिए शिवलिंग पर जल चढाने से उत्तम फल की प्राप्ति होती है।

शिवलिंग पर लगातार जल का अभिषेक करते रहने का कारन यह भी है की वातावरण की नकरात्मक ऊर्जा नस्ट हो जाती है। जैसे की समुद्र मंथन के दौरान भगवन शिव ने जब विष पिया तब उनका मस्तिष्क गर्म हुवा था और उनके मष्तिस्क को शांत करने के लिए देवताओ ने जल का अभिषेक किया था। यहाँ उल्लेखनीय है की मस्तिष्क गर्म होने का अर्थ है नकारात्मक प्रभाव को जल से शांत करना है।

क्या है वैज्ञानीक कारण ?

वैज्ञानीक तरणो के अनुशार सभी ज्योर्तिलिंग पर सबसे ज्यादा रेसिएसन देखा जाता है। क्योकि ज्यादातर शिवलिंग ग्रेनाइट(Granite) पथ्थर से बने हुवे होते है और ग्रेनाइट रेडिएशन एक का स्त्रोत है। एक शिवलिंग न्यूक्लियर रिएक्टर के जैसे रेडिओ एक्टिव एनर्जी से भरा हुवा होता है। इसी प्रलयकारी ऊर्जा को शांत रखने के लिए शिवलिंग पर लगातार जल का अभिषेक किया जाता है। ऐसा भी कहा जाता है की ताम्बे के कलश से निकला हुवा जल शिवलिंग के साथ मिल कर औषधि बन जाता है।

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