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नालंदा विश्वविद्यालय: 90 लाख पुस्तकों को जलाके भारत को हजारों साल पीछे कर दिया!

आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि भारत के अलावा जापान, चीन, तिब्बत, ईरान, इंडोनेशिया, मंगोल आदि देशों के छात्र शिक्षा के लिए यहाँ आते थे।

Nalanda university burning and 90 lakh books left Indiaby the fireflys India

हमारे देश भारत की History काफी रोचक ओर गौरव साली है वैसी ही एक Nalanda University history के बारे में हम आपसे बात करेंगे जो काफी रोचक और मन में पस्तावे के भाव प्रगट करती है।

Nalanda University प्राचीन भारत में उच्च शिक्षा के लिए सबसे अच्छा और विश्व प्रसिद्ध केंद्रों में से एक था। जो दुनिया का दूसरा सबसे पुराना विश्वविद्यालय था पहले क्रम पर तक्षशिला विश्वविद्यालय था। नालंदा विश्वविद्यालय 5 वीं शताब्दी में गुप्त वंश के शासक सम्राट कुमार गुप्ता द्वारा स्थापित किया गया था। विश्वविद्यालय वर्तमान समय के बिहार राज्य से 88 किमी दक्षिण पूर्व में और राजगीर गाँव से 11 किमी उत्तर में स्थित था। नालंदा विश्वविद्यालय दुनिया का पहला आवासीय विश्वविद्यालय था जिसमें शिक्षा के साथ-साथ खाने और ठहरने की सुविधा भी थी। उस समय नालंदा में 10,000 छात्र और 2,000 शिक्षक थे।

Nalanda University history in hindi the fireflys
Nalanda University in history

नालंदा में हिंदू और बौद्ध दोनों धर्मों के छात्र थे, जिनमें बौद्ध शिक्षक और छात्र अधिक थे, लेकिन बौद्ध धर्म की उत्पत्ति सनातन धर्म से हुई तो विशेषज्ञों का मानना ​​है कि सभी विचार और ज्ञान सनातन धर्म का उपहार हैं। लेकिन इनके साथ साथ बौद्ध धर्म के काफी सारे पुष्टक थे। जो सभी ज्ञान और मानवता के विचार सुत्रों से भरे पड़े थे।

 nalanda university history by the fireflys
Nalanda university history

आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि भारत के अलावा जापान, चीन, तिब्बत, ईरान, इंडोनेशिया, मंगोल आदि देशों के छात्र शिक्षा के लिए यहाँ आते थे। और शिक्षा के लिए यहां आने वाले सभी छात्र को परीक्षा देनी होती थी जिसके लिए संस्कृत का ज्ञान आवश्यक था।

अनुमानित 90 लाख पुस्तक संग्रह के साथ नालंदा विश्वविद्यालय के पुस्तकालय को 4 भागों में विभाजित किया गया था। इस विश्वविद्यालय में वैदो की शिक्षा के साथ साथ साहित्य, व्याकरण, विज्ञान, खगोल विज्ञान, मनोविज्ञान, कानून, अर्थशास्त्र, वास्तुकला, आयुर्वेद आदि का भी ज्ञान दिया जाता था। सायद ही कोई विषय होगा जिसकी शिक्षा यहाँ ना मिलती हो। हैरानी की बात यह भी है की यह सब ज्ञान 1500 साल पहले दिया जाता था जो अभी के विश्वविद्यालयो से भी काफी आगे है।

मुस्लिम शासकों द्वारा इस विश्वविद्यालय को 3 बार जला दिया गया था। पहले दो बार विश्वविद्यालय की मरम्मत की गई और फिर से खोल दिया गया था लेकिन तीसरी बार मुस्लिम शासक बख्तियार खिलजी(bakhtiyar khilji) ने इसे पुरी तरह जला दिया था।

एक समय में बख्तियार खिलजी ने उत्तर भारत के कई राज्यों को जीत लिया था। और कुछ समय बाद वह बीमार पड़ गया और उनके वैद्यो और चिकित्सकों ने उनकी बीमारी का कोई इलाज नहीं मिल रहा था, तब किसी ने उन्हें सुझाव दिया कि वो नालंदा विद्यालय के आयुर्वेद विभाग के प्रमुख आचार्य श्री भद्र से उपचार करवाए। लेकिन खिलजी इसके लिए तैयार नहीं था, उसे अपने वैद्यो पर ज्यादा भरोसा था और वह यह मानने को तैयार नहीं था कि प्राचीन भारत के चिकित्सक को इतना ज्ञान होगा।

लेकिन खिलजी अपनी जान बचाने के लिए आचार्य श्री भद्र के पास जाना पड़ा और यह शर्त रखी कि मैं आचार्य श्री भद्र द्वारा कोई दवा नहीं लूंगा और आचार्य बिना किसी दवा के मुझे ठीक कर दें। फिर आचार्य श्री भद्र ने उसे पढ़ने के लिए एक पुस्तक देते हैं और कहते हैं कि इसे पढ़ने से उनका इलाज हो जाएगा। किताब पढ़ने के बाद खिलजी ठीक हो गया। आचार्य श्री भद्रा ने उस पुस्तक पर दवाई लगा दी थी। पुस्तक पढ़ते समय, वह अपनी उंगली को थूक लगते हुए पुस्तक का पन्ना बदलता इससे उसके शरीर में दवाई पहुँच थी जाती और वह ठीक हो गया था।

यह जानकर उसे पता चला कि भारतीय संस्कृति बहुत आगे और बहुत उन्नत है। तब उसने भारत के आयुर्वेद और अन्य सभी ज्ञान की इस संस्कृति को नष्ट करने का फैसला किया। जिसके साथ उसने नालंदा विश्वविद्यालय के पुस्तकालय को जला दिया। जिनमें से 90 लाख पुस्तकें जलकर नष्ट हो गए। ऐसा कहा जाता है कि यह पुस्तकालय 3 महीने तक जलता रहा था। उन्होंने हजारों आचायो और शिक्षकों को भी मार डाला था।

1193 में इस घटना के साथ, भारत को हजारों साल पीछे धकेल दिया गया। भारत उस समय सबसे उच्च और सबसे अधिक सभ्य संस्कृति थी। इस घटना में भारत का कितना ज्ञान और कितने विद्वानों और पुस्तकों को जलाया गया था। भारत के साथ साथ पूरी दुनिया को हजारों साल पीछे धकेल दिया गया था। जिसका अफसोस हमेशा मानव सभ्यता को रहेगा।

हमारे इस तरह के टॉपिक्स ‘Nalanda University history’ आपको कैसे लगते है उनके बारे में हमें comment करके जरूर बयाईयेगा। और इस कहानिको अपने दोस्तों के साथ सज़ा करना ना भूले। आप भारत के प्राचीन इतिहास के बारे में जानने की जिज्ञासा रखते है तो आप यहाँ क्लिक कर ओर पढ़ सकते है।

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