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भरत, भारतवर्ष, हिंदुस्तान और भारत नाम के पीछे का इतिहास जानें।

कोरोना के समय में देश का नाम बदलने के मुद्दे पर गर्म बहस हुई है और इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दी गई है।

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आप जानते है भारत के कितने नाम थे ओर वो नाम पड़ने के पीछे की कहानी क्या है ? आज हम ‘bharat ke alag alag naam ki kahani’ को आपके सामने रखेंगे।

कोरोना के समय में देश का नाम बदलने की बात छिड़ गई है और इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दी गई है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया और इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए कहा कि याचिका को संबंधित मंत्रालय में भेजा जाना चाहिए और याचिकाकर्ता सरकार के खिलाफ अपनी मांग रख सकते है।

भारत के संविधान में देश का नाम India और भारत दोनों है लेकिन याचिकाकर्ता की मांग है कि देश में देशभक्ति बढ़ाने के लिए भारत का अंग्रेजी नाम India को बदल दिया जाना चाहिए। बहुत पहले श्रीलंका ने अपना अंग्रेजी नाम “Ceylon” बदल दिया और श्रीलंका का नाम बरकरार रखा।

प्राचीन काल में भारत के लिए अलग-अलग नाम थे जैसे कि जंबूद्वीप, भरतखंड, हिमवर्ष, अजनाभवर्ष, भारतवर्ष, आर्यावर्त, हिन्दस, हिंदू, हिंदुस्तान भारत और भारत।

भारत नाम इतिहासकार के लिए बहुत विवादास्पद रहा है क्योंकि भारत नाम के पीछे कई कहानियां हैं। पर सबसे विश्वसनीय और जिसके बारे में महाभारत में भी लिखा गया है उसके बारे हम आपको बताएँगे।

दुष्यंत-शकुंतला के पुत्र भरत से भारत

महर्षि कण्व और अप्सरा मनका की बेटी शकुंतला और पुरुवंशी राजा दुष्यंत के बीच गंधर्व विवाह होता है। इस दंपति का एक बेटा था जिसका नाम भरत था। और ऋषि कण्व ने राजा दुष्यंत को आशीर्वाद दिया कि भरत चक्रवर्ती सम्राट बनेंगे और इस पूरी भूमि का नाम उनके नाम से प्रसिद्ध होगा।

महाभारत के आदिपर्व में इसका उल्लेख है। आदिपर्व में उल्लेखनीय इस अवसर पर महान कवि कालिदास ने “अभिज्ञानशाकुन्तल” नामक एक महाकाव्य की रचना की। “अभिज्ञानशाकुंतलम” एक प्रेम कहानी है जिसकी वजह से यह कहानी लोकप्रिय हो गई। लोगों के बीच दुष्यंत-शकुंतला की प्रेम कहानी अपने बेटे से ज्यादा लोकप्रिय हुई। इस कारण उनके पुत्र महाप्रतापी भरत के बारे में कोई अन्य जानकारी उपलब्ध नहीं है।

bharat ke alag alag naam ki kahani - map of akhand bharat

भारत और भारत वर्ष

जब भरत नाम प्रचलित था तब भारतवर्ष भी प्रचलित हुआ। भारतवर्ष में कई छोटे और बड़े राज्य थे और उसके राजा भी अलग थे लेकिन उनकी संस्कृति एक ही थी इसलिए इसे भारतवर्ष कहा जाता था। आज से 1200-1300 साल पहले भारतवर्ष में Afghanistan, Pakistan, Nepal, Tibet, Bhutan, Bangladesh, Burma, Vietnam, Malaysia, Java, Cambodia, Sumatra, Indonesia, Malaysia, Maldives आदि जैसे छोटे और बड़े देश शामिल थे लेकिन समय के साथ। यह भारत से अलग हो गया।

हिंदुस्तान

जब पर्सिया(Persian) के लोग हिंदुस्तान में व्यापार करने के लिए आते थे तब वो पहले सिंधु नदी के पास के राज्यों में जाते और वहाँ से उन्हें पता चला कि सिंधु नदी भारतीयों के लिये बहुत पूजनीय है। पर्सिया के व्यापारियों की भाषा ऐसी थी कि उनकी जीभ से भारतीय सब्द ठीक से नहीं बोल पाते थे और वो सिंधु नदी को हिंदू बोलते थे और नदी के किनारे वाली जगह को हिंदुस्तान कहने लगे।

हिंदुस्तान मतलब सिंधु घाटी की सभ्यता का निवास स्थान। आमतौर पर भारतीय संस्कृति के लोग वहां रहते थे और आज इस संस्कृति को लोग हिंदू के नाम से पहचानते हैं।

हिंदुस्तान और India

फिर अंग्रेज भारत आए उस समय भारत को हिंदुस्तान कहा जाता था। लेकिन अंग्रेजों को हिंदुस्तान बोलने में मुश्किल होती थी। इसलिए तब उन्होंने हिंदुस्तान का नाम बदलने के बारे में सोचा तब जाना कि हिंदुस्तान की सभ्यता सिंधु नदी से है और सिंधु घाटी की सभ्यता को “Indus Valley” भी कहा जाता है। लैटिन में इसे India कहा जाता है। तब से अंग्रेजों ने हिंदुस्तान को India कहना शुरू कर दिया फिर ये नाम देश और विदेश में लोकप्रिय हो गया।

स्वतंत्रता से पहले India भारत का आधिकारिक(official) नाम नहीं था। फिर जब संविधान बनाया गया तब ये बात आई सामने आयी। यह सवाल उठा कि भारत का नाम क्या रखा जाए। कुछ सोच विचार के बाद भारत हिंदी और India अंग्रेजी दोनों हमारे देश के आधिकारिक नाम हो।

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